अध्याय 45 कार्यालय की राजनीति

रॉयस ने मेज़ पर हथेली का रौबदार थप्पड़ मारकर भीड़ को चुप करा दिया। उसकी आवाज़ तीखी और हुक्म चलाने वाली थी, “बहुत हुआ ये शोर-शराबा!”

उसके कहते ही फुसफुसाहटें थमकर पूरी ख़ामोशी में बदल गईं।

उसने फोन उठाया, और रिसीवर कान से लगाते ही कुछ ही पलों में दूसरी तरफ़ से ऑस्टिन की भारी, गूँजती आवाज़ सुनाई दी।...

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